सुनसान रास्तों पर चलते कदम
अचानक रुक गए.
सामने थी मेरी परछाई....
उसने मुझसे आँखे मिलाई
और पूंछा....
"जा तो रहे हो लेकिन,
मुझे साथ क्यों ले जा रहे हो??
मुझे तो छोड़ जाते और शायद
मेरे लिए ही वापस जल्दी आते
और मैं तब तक
तुम्हारा इंतज़ार करती
वहाँ!!!! क्षितिज के पीछे.."
-सुनील कुमार दुबे
(03 अप्रैल 1992, स्थान-पडरौना)
अचानक रुक गए.
सामने थी मेरी परछाई....
उसने मुझसे आँखे मिलाई
और पूंछा....
"जा तो रहे हो लेकिन,
मुझे साथ क्यों ले जा रहे हो??
मुझे तो छोड़ जाते और शायद
मेरे लिए ही वापस जल्दी आते
और मैं तब तक
तुम्हारा इंतज़ार करती
वहाँ!!!! क्षितिज के पीछे.."
-सुनील कुमार दुबे
(03 अप्रैल 1992, स्थान-पडरौना)
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